विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र १६७
स्त्री का रति सुख
जो पुरुष वाल्यावस्था में हस्तक्रिया करते हैं अथवा जो
मूर्ख लड़को के साथ दुष्ट कर्म करते हैं उनकी इन्द्री टेढ़ी और
निर्वल, नीचे का हिस्सा पतला और आगे का भारी होजाता है।
नीचे की नसें कमजोर होकर सिकुड़ जाती हैं जिसके कारण इन्द्री
छोटी पड़जाती है इसलिये वह स्त्री के गर्भाशय के पास तक नही
पहुँचती। ऐसे पतियो की स्त्रियां पति से रति का कुछ सुख प्राप्त
नहीं करती और पति पत्नी दोनो आयु पर्यन्त पछताते हैं।
मेरे पास ऐसे पुरुषो की स्त्रियाँ और लाखो चिट्ठियां अबतक
आचुकी हैं। ऐसे पुरुषो की स्त्रियो द्वारा उनका इलाज करके
उनकी शिकायतें दूर कर दी गई हैं और उन्हें दाम्पत्य जीवन का
सच्चा फल स्वरूप सन्तान उत्पन्न हुई और हो रही है।
यदि पुरुष के हस्तक्रिया आदि दुष्ट कर्म से कुछ भी खराबी
उत्पन्न न हुई तो अधिक विषय और विपरीत आसन से रतिक्रिया
करने से भी पुरुष की इन्द्री मे सुस्ती और कमजोरी आजाने से
गर्भ नही रहता।
यदि पुरुष की इन्द्री मे किसी प्रकार की भी खराबी न हो
केवल वीर्य मे खराबी हो तो भी गर्भ नहीं रहता। यदि पुरुष को
वीर्य की खराबी से शीघ्रपात की शिकायत है तो भी उसकी स्त्री
को रतिसुख प्राप्त नही होता और गर्भ नही रहता।
यदि पुरुष की उत्तेजना शक्ति ठीक है परन्तु स्त्री के पास