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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 634

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४५१


किसी योग्य न थे। जब स्त्री तरुणी हुई तब भी पति नावालिग ही
रहे। जब पति प्रसंग करने योग्य हुए तब तक पत्नी वृद्धा हुई फिर
बतलाये दोनो का जीवन व्यर्थ हुआ या नही। यह बात दूसरी है
कि लड़कपन से ही नावालिगी मे ही पति प्रसंग करना शुरू करदे
तो भी तो पति का जीवन रोगो का घर बन जाता है और पत्नी
भी प्रसंग के योग्य अवस्था होने पर, यदि पति ठीक न हुआ तो
रोगी और दुष्ट स्वभाव की होजाती है । इस प्रकार कुसमय प्रसंग
आरम्भ होने से पति पत्नी दोनो का जीवन वरवाद होता है ।
यह बात मै अपने पचीस वर्ष के अनुभव से हजारो ऐसी
स्त्रियो के रोगो की चिकित्सा करके तथा उनके शोक और चिन्ता
को देख सुनकर लिख रही हूं क्योंकि ऐसे स्त्री पुरुषो का जीवन
व्यर्थ जाता है और सन्तान भी नही होती । ऐसे कुटुम्ब वाले भी
दुःखित और चिन्तित रहते हैं और स्त्रियां भी प्रायः दुष्ट स्वभाव
की होजाती हैं ।
ऐसी स्त्रियो को यदि दुष्ट स्त्रियो की संगति मिलगई तो वे
कुल को कलंकित करती हैं और ऐसी स्त्रियों के पति भी
व्यभिचारी हो जाते हैं । फिर गरमी सुजाक आदि भयंकर रोगो
मे ग्रसित हो दुःखमय जीवन व्यतीत करते हैं अथवा जो कुसं-
गति से बचे रहे तो उदासीन रोगी निर्बल और दुर्बलता से
जीवन व्यतीत करते है। परन्तु पता लगाया जावे तो ऐसे पति कम
निकलेगे। स्त्रियां तो किसी प्रकार अपना जीवन पतिव्रत धर्म की
रक्षा कर काट भी लेती हैं किन्तु अनेक पति इसी कारण दूसरा विवाह