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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 598

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४१६
उदावर्तिनी योनि
आर्तवे या विमुक्ते तु तत्क्षणं लभते सुखम् ।
रजसो गमनादूर्ध्वंज्ञेयोदावर्तिनी बुधैः ॥
अर्थात्—आर्त्तव के निकलने से जिसमे तत्काल चैन पड़
जाता है जब तक ऋतु आरम्भ होता है तब तक बड़ा कष्ट होता
है। ऋतुधर्म होजाने पर कष्ट दूर होजाता है। रज के ऊपर जाने
के कारण इसको उदावर्तिनी कहते हैं।
कर्णिनी योनि
अकाले वाहमानाया गर्भेणापिहितोऽनिलः ।
कर्णिकां जनयेद्योनौ श्लेष्मरक्तेन मूर्छितः ॥
रक्तमार्गावरोधिन्या सातया कर्णिनी मता ।
अर्थात्—छोटी अवस्थावाली स्त्री में गर्भधारण करने से
गर्भ के कारण आच्छादित वायु कफ और रक्त से मिली हुई एक
प्रकार की गांठ योनि के मुख पर उत्पन्न कर देती है। यह गांठ
रक्त के मार्ग को रोकदेती है इसलिये इसे कर्णिनी कहते हैं।
पुत्रघ्नी योनि
रौक्ष्याद्वायुर्यदा गर्भं जातं जातं विनाशयेत् ।
दुष्ट शोणितजं नार्या पुत्रघ्नी नाम सा मता ॥