विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१६ आनन्द मन्दिर
प्राक्चरणा योनि
मैथुनादति बालायाः पृष्ठजंघोरुवंच्क्षणम् ।
रुजयन् दूषियेयोनिं वायुः प्राक्चरणा तु सा ॥
अत्यन्त वाला स्त्री के साथ मैथुन करने से उसकी पीठ जांघ
ऊरु और वक्षण मे वेदना उत्पन्न करके वायु योनि को दूषित
कर देती है ऐसी योनि को प्राकचरणा कहते हैं । प्राकचरणा उसे
कहते है जो स्त्री पुरुष सहवास के योग्य अवस्था वाली न होवे
किन्तु छोटी आयु में मूर्खतावश कामान्ध पुरुष से सहवास करे
तो ऊपर लिखा रोग उत्पन्न होता है उसे ही प्राक्चरणा कहते है ।
अतिबाला स्त्री उसे कहते है जिसकी अवस्था १६ वर्ष से कम
हो, आयुर्वेद के सुश्रुत ग्रन्थ मे बतलाया हैः—
ऊनषोडशवर्षायामप्राप्तः पंचविंशतिम् ।
यद्याधत्ते पुमान् गर्भं कुक्षिस्थः स विपद्यते ॥
जातो वा न चिरंजीवेज्जीवेद्वा दुर्बलेन्द्रियः ।
तस्मादत्यन्त बालायां गर्भाधानं न कारयेत् ॥
अर्थात्—सोलह वर्ष से कम अवस्था वाली स्त्री मे पचीस
वर्ष से कम अवस्थावाला पुरुष जो गर्भ को स्थापन करे तो वह
नष्ट हो जाता है यदि नष्ट न भी हो तो निर्बल और रोगी रहकर
शीघ्र ही यम का ग्रास बन जाता है ।