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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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५१४ आनन्द मन्दिर
पदार्थ वात पित्त कफ तीनों को बढ़ाने वाले हैं उनका अधिक
सेवन करने से सब रस दूषित होकर योनि गर्भाशय का
आश्रय लेकर अपने अपने लक्षणों को प्रकट करते हैं। तीनों दोषों
के कारण जो योनि रोग उत्पन्न होते हैं उनसे योनि में जलन
पीडा, आदि से कष्ट अधिक होता है तथा योनि से सफेद और
गिलगिला आर्तव निकलता है। इस प्रकार की दूषित योनि में
कभी २ बडी खराबी हो जाती है ।
रक्त पित्तज योनि रोग
रक्तपित्तकरैर्नार्या रक्त पित्तेन दूषितम् ।
अति प्रवर्त्तते योन्या लब्धे बीजेऽपि साप्रजा ॥
रक्त पित्तोत्पादक आहारादि सेवन करने से रक्त पित्त के
कारण दूषित होकर योनि मे से रक्त निकलने लगता है इस दशा
मे स्त्री गर्भधारण नही कर सकती इसे रक्त पित्तज कहते हैं।
अरजस्का योनि
योनिगर्भाशयस्थं चेत् पित्तं संदूषयेदसृक् ।
सारजस्का मता कार्श्यवैवर्ण्य जननी भृशम् ॥
अर्थात्—योनि और गर्भाशय मे रहने वाला पित्त जब रक्त
को दूषित कर देता है तब रजोधर्म होना वन्द होजाता है और