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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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४१२ आनन्द मन्दिर


उत्पन्न होते है। वात के कारण उस स्त्री को योनि से पतला
रूखा झागदार रक्त निकलता है रक्त निकलते समय कुछ शब्द
भी होता है ।

आहार—खाने पीने के पदार्थों को आहार कहते है। विहार
आमोद प्रमोद स्नान चलना फिरना सोना घूमना और स्त्री प्रसंग
करना इत्यादि सब विहार कहलाता है ।

आहार और विहार मे मनुष्य के सभी कार्य समझने चाहिये
इनको नियम पूर्वक न करने से अनियम आहार विहार कहे जाते
है । अनियम आहार विहार से रोगो की उत्पत्ति होती है और
नियम पूर्वक आहार विहार करने से शरीर आरोग्य और हृष्ट पुष्ट
रहता है ।

पित्तज योनि रोग

व्यायत्तथास्लवणात्क्षारैः पित्तजा भवेत् ।
दाह पाकज्वरोष्णार्त्ता नीलपीतासितार्त्तवा ॥
भृशोष्णकुणपस्त्रावा योनिः स्यात् पित्तदूषिता ।

अर्थात्—खट्टे पदार्थों का अधिक सेवन करने से तथा नम-
कीन और क्षारवाले पदार्थों के अधिक सेवन करने से पित्त कुपित
होकर योनि रोगो को उत्पन्न करता है जिसे पित्तज योनि रोग
कहा है। पित्त के कुपित होने से जो रोग उत्पन्न होते है उनमे
स्त्री की योनि मे दाह जलन योनिपाक और योनि मे पीड़ा
उत्पन्न होती है ।