विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४१९
अनियम आहार विहार से स्त्रियों के
अन्य रोग
भोग और संभोग अर्थात् आहार विहार और संभोग
आदि के अनियम से स्त्री पुरुषों मे जो रोगों की उत्पत्ति होती है
उन रोगों से सैकड़ा पीछे निन्यानवे स्त्रियां रोगी देखी जाती हैं
इसी कारण पुरुषों की भी रोगी संख्या स्त्रियों की रोगी संख्या
से कम नहीं है ।
वातज योनि रोग
वातलाहार चेष्टाया वातलाया समीरणः ।
विवृद्धो योनिमाश्रित्य योनेस्तोदं सवेदनम् ॥
स्तम्भ पिपीलिकास्तृसिमिव कर्कशतां तथा ।
करोति सुप्तिमायां वातजांश्चापरान् गदान् ॥
सा स्यात् सशब्दरुत्फेनं तनुरुक्तार्तवानिलात् ।
अर्थात्—वात प्रकृति वाली स्त्री यदि वात को बढ़ाने वाले
आहार विहार और चेष्टा करे तो वायु अत्यन्त कुपित होकर
योनि का आश्रय लेकर योनि रोगों को उत्पन्न करती है। इस दशा
मे योनि मे सुई चुभने की समान पीड़ा होती है और चींटी चलने