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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 584

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४०७
अज्ञानतावश विषय वासना मे लिप्त जो रात दिन अनेक
प्रकार के आसनों और स्तम्भन की औषधियों की खोज मे रहते हैं
और नियम के विरुद्ध योनि संकोचन तथा इन्द्री वृद्धि कारक औषधि
की खोज मे रहा करते हैं तथा ऐसे हानिकारक प्रयोगो के आनन्द
में स्वर्ग का रास्ता ढूंढते हैं ऐसे पुरुषो की स्त्रियां जो अज्ञानता
से योनि संकोचन की औषधियां काम मे लाती हैं उन स्त्रियो
के गर्भाशय मे अनेक प्रकार की खराबियां आजाती हैं । किसी
का गर्भाशय तीक्ष्ण औषधियो के कारण खराब हो जाता है, किसी
के गर्भाशय का मुख सूख जाता है। गर्भाशय के मुख का रक्त
जल कर उसका मुख मुरझा जाता है। किसी के गर्भाशय का
मुख भीतर को धस जाता है, किसी के गर्भाशय का मुख लटक
कर बेकार हो जाता है और वे स्त्रियां सदैव के लिये वन्ध्या हो
जाती हैं तथा रति सुख से आयु पर्यन्त वचित रहती हैं।
प्रकृति के नियम के विरुद्ध गर्भाशय से काम लेने से उसमें
अनेक प्रकार की खराबिया उत्पन्न होती हैं और स्त्रियो तथा पुरुषो
दोनो को व्यर्थ के हानि कारक प्रयोगो से हानि पहुँचती है इसी
कारण पुरुषो को अनेक रोग घेर लेते हैं।
अधिक प्रसंग से तथा संकोचन की औषधियो से स्त्रियो की
योनि में सूजन उत्पन्न हो जाती है जैसा कि अन्यत्र चित्र मे दिखलाया
गया है गर्भाशय के मुख के सामने योनि की दीवार दोनो तरफ सूजी
हुई है। यदि इस सूजन का उपाय न किया जावे और अधिक
दिन तक सूजन उत्पन्न होने पर भी वरावर संभोग किया जावे तो.