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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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१८ भूमिका
सुरखी ग़ज़ब की कैसी थी इक इक अनार पर ।
जोबन बरस रहा था हर एक आवशार पर ।
आलम था चांदनी का ग़जब सब्जाजार पर ॥
भौंरे कमल पै मस्त ममोले थे वनमें खुश ।
तती मगन हवा में तो बुलबुल चमन में खुश ॥
आवाज प्यारी प्यारी ग़जब कोकिला की थी ।
छवि आह चांदनी में किसी मह्लक़ा की थी ॥
हसो की चाल इक बुते नाजुक अदा की थी ।
अठ खेलियां थीं शोखी की वह भी वला की थीं
हर शै को नाज हुस्न पै तेरे करम से था ।
फूलों पै आब तुझ गुलेराना के दम से था ॥
वन वासियों को तेरे ही दम से कदर था ।
एक एक हंस चाल पै तेरे निसार था ॥
मुखडे से तेरे शब में चांद शर्मसार था ।
हाला गले का उतरा हुआ तेरा हार था ॥
भौंरे थे शर्मगीं तेरी जुल्फे सियाह से ।
घायल हिरन भी थे तेरी तीरे निगाह से ॥
जङ्गल में हम सरूद तेरे को