विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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करते हैं उनकी स्त्रियों के गर्भाशय का मुख अधिक दबाव पड़ने
से खुला ही रह जाता है यदि इस गर्भाशय को दो तीन महीने
विश्राम देदिया जावे प्रसंग न किया जावे तो ठीक भी होजाता
है। यदि ऐसी दशा में अनेक बार प्रसंग हुआ तो गर्भाशय का
मुख इसी प्रकार खुला रह जाता है उस स्त्री के मासिकधर्म्म के
समय रक्त अधिक और अधिक दिनों तक जाता रहता है।
इस रोग वाली स्त्री के गर्भ नहीं रहता। इस रोग वाली
अनेक सन्तान हीन स्त्रियां मेरे पास इलाज के लिये आईं उनकी
जबानी मालूम हुआ कि उनके पति देव मासिक धर्म्म की दशा
में भी अपनी कामाग्नि शान्ति करते रहे।
इसी कारण हमारे आयुर्वेद में ऋषियों ने ऋतुमती
स्त्री को पति से अलग रहना लिखा है और ऋतुमती स्त्री को
बड़े आचार विचार से ऋतु समय के दिनों को व्यतीत करना
बतलाया है। ताकि स्त्री के गर्भाशय में किसी तरह की खराबी
न हो।
बतलाया है कि रजस्वला स्त्री प्रथम दिन से तीन दिन
पर्यन्त कुश की शैया पर सोवे और हाथों में या मिट्टी के बरतन
में अथवा पत्तल में सादा भोजन करे और तीन रात्रि पर्यन्त
पति को भी न देखे तदनंतर चौथे दिन शुद्ध स्नान कर उत्तम
वस्त्रों को पहिन तथा आभूषणों को पहिन श्रृंगार कर सुगन्धित
द्रव्यों से देह, वस्त्र सुवासित करके प्रसन्न मुख होकर पति का
दर्शन करे।