विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३७२ आनन्द मन्दिर
इस गांठ की उत्पत्ति का दूसरा कारण यह भी है कि
मासिकधर्म्म के दिनों मे अपथ्य से रहने से आहार के अनियम से
भी प्रायः यह गांठ पड़ जाती है। किसी कारण से भी मासिकधर्म्म
के दिनो मे आहार अथवा संभोग सम्बन्धी अनियम होजाने से
भी यह गांठ उत्पन्न होती है । यह गांठ गर्भाशय के बाहर मुख
पर और भीतर भी होती हैं ।
गर्भाशय की भीतरी गांठ
गर्भाशय के भीतर जो गांठ उत्पन्न हो जाती है । इसी को
वैद्यक मे गुल्म रोग कहा है । इसके उत्पन्न होने से गर्भ नहीं रहता
क्योंकि पुरुष का वीर्य गर्भाशय मे ठहरता नहीं। यह गांठ धीरे
धीरे बड़ी होजाती है तब स्त्री की दशा दिन दिन बिगड़ती जाती
है, ज्वर रहने लगता है, भूख कम होजाती है, प्रसंग के समय
पीड़ा होती है और स्त्री सदैव के लिये वन्ध्या हो जाती है। केवल
वन्ध्या ही नही हो जाती वल्कि सदैव उसे एक न एक रोग घेरे
रहता है ।