विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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गर्भाशय के रोग
विपरीत आसन और अनियम संभोग से वन्ध्या दोष उत्पन्न
हो जाते हैं। २५ पचीस वर्षों तक लाखो स्त्रियो की रोग परीक्षा
तथा चिकित्सा, से इस वात का मुझे अनुभव हुआ है। स्त्रियो के
गर्भाशय के मुख पर तथा गर्भाशय के भीतर और योनि मुख पर
तथा योनि के भीतर अनेक रोग उत्पन्न होते देखे गये हैं।
गर्भाशय के भीतर तथा मुख पर गांठ मस्सा होने और गर्भा-
शय के अनेक प्रकार से टेढ़ा हो जाने से रोग उत्पन्न हो जाते है।
गर्भाशय की गांठ
चित्र मे गर्भाशय के मुख पर गांठ
दिखलाई गई है जो अनेक बार रोगी
स्त्रियो की गुप्त रोग परीक्षा करने से
देखी गई है। यह स्त्री के मासिकधर्म्म
के समय अनियम आहार विहार
तथा रतिक्रिया करने से प्रायः उत्पन्न
हो जाती है। इस प्रकार की रोगी
स्त्रियो की जवानी मालूम हुआ है
कि मासिकधर्म के दिनो में भी उनके
मूर्ख पति ने विपरीत आसन से संभोग
किया तभी से मासिकधर्म्म की
शिकायत भी होगई और संभोग के समय कष्ट भी होने लगा।