विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६२ आनन्द मन्दिर
के मुख की उन चुन्नटो को फैला देती है जिससे गर्भाशय का
मुख फैल जाता और मासिक धर्म्म का रक्त निकल जाता है,
कोई कष्ट नही होता। यदि गर्भाशय मे किसी प्रकार की खराबी
न हुई तो मासिक धर्म्म के दिनो मे गर्भाशय की चुन्नटे ठीक ठीक
खुल जाती है और रक्त भलीभांति निकल जाता है।
आरोग्यता की दशा में
जिस गर्भाशय मे किसी प्रकार की खराबी नही होती उसका
मुख ठीक खुल जाता है।
आगे के चित्र मे गर्भाशय का चित्र जननेन्द्री के सब अंगो
सहित दिखलाया गया है। यदि गर्भाशय मे किसी प्रकार का
रोग न हो तो वह पुरुष के वीर्य को अपनी ओर आकर्षण करके
अर्थात् खींच कर अपने मुख मे लेकर मुख वन्द कर लेता है वही
पुरुष का वीर्य गर्भाशय के भीतर जाकर स्त्री के रज मे मिलकर
गर्भधारण करता है।
जिस संभोग में स्त्री पति से पहिले ही स्खलित हो जाती है
उसका रज गर्भाशय मे पहिले से ही मौजूद रहता है, उसी क्षण
पुरुष का भी वीर्य गर्भाशय में पहुचकर स्त्री के रज मे मिल जाता
है। इस प्रकार स्त्री के पहिले स्खलित होने से कन्या उत्पन्न
होती है।
यदि पुरुष का वीर्य गर्भाशय मे पहिले से पहुँच जावे और
स्त्री पुरुष से पीछे स्खलित हो तो पुत्र के गर्भ की स्थिति होती है।