विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३६१
योनि और गर्भाशय
स्त्री की योनि शंख की नाभि की
समान तीन पर्तवाली होती है उसके
तीसरे पर्त मे गर्भाशय है और वह
बहुत पतली और कोमल नसो से
मिलकर बना हुआ है। जैसा रोहू
मछली का मुंह होता है, उसी आकृति
का गर्भाशय होता है, ऊपर से छोटा
और भीतर से फैला हुआ होता है
जैसा कि ऊपर चित्र मे दिखलाया
गया है।
गर्भाशय सफेद रग का बहुत
कोमल और सुन्न होता है जिससे
बच्चे के बोझ से और खिचाव से (जो गर्भ के बढ़ने मे होता है)
स्त्री को कष्ट न हो। गर्भाशय के दूसरे पर्त मे बहुत सी नसे और
चुन्नटे हैं इन्ही चुन्नटो और नसो के कारण गर्भ रुकता है।
गर्भाधान, क्रिया से अर्थात् सभोग से जब पुरुष का वीर्य
गर्भाशय मे जाता है तब वही चुन्नटे प्राकृतिक नियम से खिच
जाती है जिससे गर्भाशय मे वीर्य पहुचते ही गर्भाशय का मुख
अपने आप ही बन्द होजाता है।
मासिक धर्म्म के समय रक्त निकलने के लिये प्रकृति गर्भाशय