विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३५६ आनन्द मन्दिर
गर्भरक्षा
जब मालूम हो कि गर्भ रह गया तब स्त्री को बडी सावधानी
से रहना चाहिये। ये बात पहिले ही समझाई गई है कि माता
जैसा आहार विहार करती है उसका प्रभाव बालक पर पडता है
नाडियो के द्वारा माता के आहार विहार का प्रभाव बच्चे पर
पडता है।
जब मालूम हो जावे कि गर्भ रह गया तब से गर्भवती स्त्री
को बड़ी सावधानी से रहना चाहिये। भारी आहार तथा कब्ज
करने वाली वस्तुएं न खानी चाहिये। देर मे पचे अथवा बदहजमी
करे ऐसे पदार्थों का सेवन छोड देना चाहिये। गर्भावस्था में भारी
और अधिक ऋतु और प्रकृति के विरुद्ध भोजन से प्रायः अनेक
रोग उत्पन्न हो जाते हैं। जो स्त्री गर्भावस्था मे आहार-विहार का
ठीक नियम रखती हैं उन्हे प्रसव के समय किसी प्रकार का कष्ट
नही होता। गर्भवती को यदि दस्तो का रोग उत्पन्न हो जावे
और अधिक बढ़जावे तो गर्भपात होने की सम्भावना रहती है
बहुधा गर्भ गिर भी जाता है। इसलिये गर्भावस्था मे ऐसे भी
पदार्थ न खाने चाहिये जो दस्त लावे या पेट मे किसी तरह की
शिकायत पैदा करे। गर्भावस्था मे बड़ी सावधानी से रहना
चाहिये, शरीर को आराम देना चाहिये।