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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३५५

का मुह, आंख के सामने आंख हो और एक दूसरे को प्रेम और
प्रसन्नता की दृष्टि से देखते रहे। स्त्री पति की मुखाकृति को अपने
हृदय मे धारण करे। जिस समय पुरुष का वीर्य पात होने लगे उस
समय स्त्री अपनी श्वास ऊपर को खींचे और कुछ देरी तक श्वास
ऊपर को ही खींचे रहे।
ऐसे समय की प्रसन्नता और स्थिति का प्रभाव गर्भपर पड़ता
है। आयुर्वेद के लेखानुसार गर्भाधान क्रिया करने से उत्तम
सन्तान की प्राप्ति होती है और स्त्री पुरुष दोनो स्वस्थ तथा प्रसन्न
रहते हैं।
गर्भधारण के लक्षण
लिंगंतु सद्योगर्भाया योन्यां बीजस्य संग्रहः ।
तृप्तिर्गुरुत्वं स्फुरणं शुक्रास्राननुबंधनम् ॥
हृदय स्पंदनं तंद्रा तृड् ग्लानिर्लोमहर्षणम् ।
अर्थ.—तत्काल गर्भको धारण करने वाली स्त्री के ये लक्षण
होते है। यथा योनि में बीज का सम्यक रीति से ग्रहण, तृप्ति,
(आहार की अनिच्छा) कोख मे भारीपन, फड़कन, संभोग
के बाद योनि से वीर्य का वाहर न निकलना, हृदय मे प्रसन्नता,
आखो मे आलस्य, तृषा, ग्लानि और रोमांच होना ये लक्षण
तत्काल गर्भधारण के हैं। गर्भवती को ध्यान से देखने से ये लक्षण
पहचान मे आजाते हैं।