विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 508, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३५३
इस मत्र का पाठ करे इसका अर्थ इस प्रकार है:—
शेष भी तू ही है। आयु भी तू ही है । धाता विधाता तुझे
ब्रह्म तेज से धारण करे । ब्रह्मा, विष्णु, गृहस्पति, चन्द्रमा, सूर्य,
अश्विनी कुमार, भगमित्र, वरुण ये सब मुझको वीर पुत्र दे।
सांत्वयित्वा ततोऽन्यं संविशेतां मुदान्वितौ।
उत्ताना तन्मना योषित्तिष्ठेदङ्गैः सुसंस्थितैः ॥
तथाहि बीजं गृह्णाति दोषैः स्वस्थानमास्थितैः।
स्त्री पुरुष दोनो आपस मे एक दूसरे को प्रेम प्यार से और
मीठी प्यार की बातो से अर्थात् आलिंगन चुम्वन से तृप्त करके
अनेक प्रकार से प्रसन्न करे ।
इसी तरह अनेक प्रकार के आलिंगन चुम्वन के अर्थ विषयी
पुरुषो ने आसन समझ रक्खे हैं। सम्भव है कोका पंडित ने जिनके
नाम को कोकशास्त्र ने वदनाम कर रक्खा है इसी आशय को
लेकर अनेक प्रकार के आसन वना डाले हो अथवा अन्य किसी
विषयी राजा को ठकुर सुहाती कहने वाले ने मनगढ़त विपरीत
रतिक्रिया के उपाय वताये हो, उन्ही को लोग कामशास्त्र के आसने
समझने लगे हो।
पीछे लिखा जा चुका है कि आयुर्वेद का एक अग काम-
शास्त्र है और उसमे यही विषय है। विषयी पुरुषों ने इसका कुछ
और आशय समझ रक्खा है।
२३