विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र - ३५१
रतिक्रिया का प्राकृतिक नियम और
उत्तम सन्तान
इच्छेतां यादृशं पुत्रं तद्रूपचरितांश्च तौ ।
चिंतयेतां जनपदांस्तदा चार परिच्छदौ ॥
इसका अर्थ यह है कि स्त्री पुरुष को जैसे पुत्र की इच्छा हो
वैसे ही रूप ( वर्ण संस्थान प्रमाण आकृति ) और चरित्र (श्रद्धा
श्रुत, ऋजुता, आनृशंस्य, दान, दया, दाक्षिण्यादि स्वभाव वाले )
तथा आचार ( कुल और देश के अनुरूप कर्त्तव्य कर्म ) और
परिच्छद् ( मनुष्य गौ, घोड़ा, धन, धान्य, वस्त्र, अलंकार, रत्न,
रथ, वाले ) मनुष्यो का ध्यान करे ।
कर्मांते च पुमान्सर्पिः क्षीरशाल्योदनाशितः ।
प्राग्दक्षिणेन पादेन शय्यां मौहूर्तिकाज्ञया ॥
आरोहेत् स्त्री तु वामेन तस्य दक्षिण पार्श्वतः ।
तैल माषोत्तराहारा तत्रमंत्रं प्रयोजयेत् ॥
अर्थात् पुरुष घी और दूध मिलाकर शाली चावलो ( भात )
का भोजन करके शुभ मुहुर्त का विचार कर उत्तम सन्तान की
हृदय मे इच्छा करके सभोग के लिये स्त्री के पास जावे ।
पीछे लिखा जा चुका है कि शास्त्रकारो का मत है, पति