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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 498

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३४५
मैंने उसका इलाज किया। पन्द्रह दिन में वह अच्छी होकर
घर चली गई परन्तु उसकी चिट्ठी आई इससे मालूम हुआ कि
उसकी इच्छा शक्ति नष्ट होगई है। मैंने उसको समझा दिया था
कि एक वर्ष तक तुम ब्रह्मचर्य में रहो तब आराम होगा यदि
फिर तुम्हारे पति ने ऐसी मूर्खता की तो तुम सदैव के लिये
सम्भोग शक्ति नष्ट होने से वंध्या हो जाओगी, अपने पति को नम-
झती रहो। परन्तु इस मूर्ख पति ने अपनी आदत नहीं छोड़ी।

एक और स्त्री इसी प्रकार की मेरे पास बहुत दुःखी होकर
आई। उसकी अवस्था लगभग ३५ पैंतीस वर्ष की थी उसके
कोई सन्तान नहीं थी, कभी गर्भ नहीं रहा। वह मेरे पास सन्तान
का इलाज कराने के लिये आई थी, उसे कोई रोग प्रत्यक्ष में नहीं
था। मैंने उसके गर्भाशय आदि की परीक्षा की, गर्भाशय में किसी
प्रकार का रोग नहीं पाया। तब मैंने उसे अपने रोगी आश्रम में
मासिक धर्म की परीक्षा करने के लिये ठहराया। वही समय उसका
मासिक धर्म होने का निकट था वह तीन चार दिन बाद मासि-
कधर्म से हुई। मैंने तीन दिन तक