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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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[Heading] विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३४१

रहे तो यह रोग कभी नही होता । योनि को प्रतिदिन अवश्य
धोते रहना चाहिये ।
किसी स्त्री की ऋतुस्नान के १५ पन्द्रह दिन वाद अत्यन्त
प्रवल इच्छा संभोग की हो और योनि मे खुजली भी हो तो
समझ लेना चाहिये कि यही रोग है क्योकि ऋतुस्नान के दिन
से पन्द्रह दिन तक तो हर एक स्त्री की इच्छा गर्भधारण के लिये
सभोग की होती है इसके बाद नही होती । जिनके पतियो ने
अधिक प्रसंग से पत्नी की आदत विगाड़ दी है उनकी वात ही
और है । पतियों की मुर्खता से उस स्त्री की इच्छा विना प्रयो-
जन के भी हुआ ही करती होगी ।
न० ३ भगनाशा का आगे का हिस्सा जिसे योनि लिंग भी
कहते हैं, इसकी बनावट पुरुष की इन्द्री की रीति पर है । यह
स्त्री की जननेन्द्री के ऊपर के हिस्से मे जैसा चित्र मे वतलाया गया
है जिस स्थान पर रोग उत्पन्न होते हैं उसके नीचे और दोनो
बड़े भगोष्ठो के शुरू होने के बीच मे त्रिकोणाकार ऊँचा भाग
नासाकृति से मिलता हुआ होता है ।
इस योनि में लिंग के स्पर्श से ही स्त्री मे उत्तेजना उत्पन्न होती
है इसको भूलकर भी स्पर्श नही करना चाहिये । जिसप्रकार पुरुष
हस्तक्रिया आदि से नपुंसक होजाते हैं इसीप्रकार इसका अधिक
स्पर्श स्त्री को नपुंसक बना देने वाला है । जो स्त्रियां मूर्खतावश
इसका स्पर्श कर उत्तेजना उत्पन्न करती हैं वे उत्तेजना शक्ति से कुछ
दिनों में हीन होजाती हैं और फिर गर्भधारण के योग्य नही रहती ।