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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 489

३३८ आनन्द मन्दिर
तीन वर्ष के लगभग का समय व्यतीत हुआ एक रानी
साहबा मेरे पास इसी रोग वाली आईं। उन्होंने मुझसे अपनी इस-
शिकायत का हाल बतलाया। उन्होंने कहा—छै महीने से मेरी
यह दशा है कि रात दिन सम्भोग के लिये चित्त चंचल रहता है
मै संकोच और लज्जा के कारण इस बात को किसी से कह नहीं
सकती, न जाने क्या कारण है। छै महीने से बड़ी व्याकुलता
हो रही है। पति से मैने यह बात नहीं कही, कहते लज्जा मालूम
होती है, न जाने वह क्या समझ जावे। किसी डाक्टर वैद्य से
भी कह नही सकती। खुजली होती है और खुजली के साथ ही
सम्भोग की इच्छा होती है। पति जी से योनि की पीड़ा का
बहाना करके आपके पास इलाज कराने आई हू।
मै रानी साहबा से इतना हाल सुनते ही समझ गई और
कमरे के भीतर लेजाकर मैने उनकी जनेन्द्री की परीक्षा की तो
उनके छोटे भगोष्ठों मे छाले पड़े हुये थे और सूजन भी आगई
थी। मैने उसी दिन औषधि का काढ़ा कराकर योनि मार्ग को
धुलवाया और रानी साहबा से पूछा कि आप योनि कभी धोती नहीं
हैं ऐसा मालूम होता है ? उन्होंने कहा मै बाहर से तो प्रतिदिन
धोया करती हूं, भीतर नहीं धोती, क्या भीतर भी धोना चाहिये ?
मैंने उन्हे समझाया और न धोने की हानि बतलाई, मैंने
एक सप्ताह उन्हे अपने यहां रोगी आश्रम मे ठहरा कर इलाज
किया वे बिलकुल ठीक होगईं।
एक और स्त्री ने मुझे लिखा कि मेरे पति घर पर नहीं हैं