विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 432, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र २६१
बालकों के रोगों और मृत्यु की
अधिकता का कारण
सैकड़ा पीछे निन्यानवे पुरुष बाल्यावस्था के दुर्व्यसनों हस्त-
क्रिया आदि के कारण और विवाह होने पर अपनी स्त्री से रात
दिन विषय भोग तथा तिसपर भी इच्छा की शान्ति न होने पर
वेश्यागमन से गरमी सुजाक आदि भयंकर रोगों से जीवन भर
के लिये रोगी बन जाते हैं और स्त्री को भी रोगी बना देते हैं
इस प्रकार दोनों रोगी हो रोगी सन्तान उत्पन्न करते हैं पहिला
कारण बालकों की अधिक रोगी तथा मृत्यु संख्या का यह है।
दूसरा कारण
सैकड़ा पीछे एक ही दो पुरुष गर्भाधान क्रिया नियम पूर्वक
करते हैं वरन सैकड़ा पीछे निन्यानवे पुरुष ऐसे हैं जो केवल विषय
वासना की तृप्ति के लिये सम्भोग करते हैं। सन्तान तो धोखेधड़ी
में होजाती है। नियम विरुद्ध गर्भ रहने से बालक रोगी और
अल्पायु होते हैं।
तीसरा कारण
पति पत्नी से जैसा चाहिये प्रेम नहीं करते। प्रेम न करने
से और केवल विषय वासना की तृप्ति के समय ही ऊपरी दिखा-
वटी प्रेम करके अपना मतलब गांठ लेते हैं फिर पति पत्नी में