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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २७५
पुरुषार्थ हीनता या नपुंसकत्व
अब मैं यहां पर सब प्रकार के नपुंसकों का वर्णन विस्तार
करती हूं क्योकि जितने नपुंसक हैं सब माता पिता की
मूर्खता से ही विपरीत रति करने से उत्पन्न होते हैं। इन्हीं सब
नपुंसको से पाठक आसनों का फल समझ ले।
नपुंसक पुरुष के लक्षण
वैद्यक शास्त्र बतलता है कि:—
संकल्प प्रवणो नित्यं प्रियां वश्यामथापि वा ।
न याति लिंग शैथिल्यात्कदाचिद्याति वा यदि ॥
अर्थ यह है कि पुरुष स्त्री प्रसग करने की इच्छा तो मन
में सदैव करे परन्तु अपनी स्त्री से भी प्रसग न कर सके इन्द्री
की कमजोरी के कारण स्त्री के पास जाते भी डरे। यदि किसी
प्रकार प्रसग करे भी तो शीघ्रही उस पुरुष का श्वास फूलने लगे
और शरीर मे पसीना आने लगे। इन्द्री मे ठीक ठीक उत्तेजना न
हो। इसप्रकार वह पुरुष लज्जित होकर बड़ा दुःखी हो और उस
बिचारे के विचार मन के मन मे ही रह जावे। यह साधारण
नपुंसको के लक्षण हैं।
जिन पुरुषो मे ये लक्षण पाये जावे उन्हे नपुंसक समझ
लेना चाहिये चाहे वे जन्म से हों अथवा किन्ही कारणो से पैदा
होगये हो।