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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २५१
माता पिता के विचारों का
सन्तान पर प्रभाव
माता पिता के विचारो का सन्तान पर बड़ा भारी प्रभाव
पढता है उसी प्रकार की सन्तान उत्पन्न होती है ।
आयुर्वेद बतलाता है:—
आहाराचारचेष्टाभिर्यादृशीभिः समन्वितः ।
स्त्रीपुंसौमुपेयातां तयोः पुत्रोपितादृशः ॥
अर्थात्—माता पिता जैसे आहार विहार आचार और
चेष्टा मे संभोग करते हैं उससे जो गर्भ रहता है उसी प्रकार
के गुण अवगुण सन्तान मे भी उत्पन्न होते हैं ।
निर्लज्ज, लज्जावान्, हास्य प्रिय, आलसी सदाचारी, व्यभि-
चारी निर्बल रोगी दीर्घजीवी इत्यादि सब प्रकार के गुण अवगुण
माता पिता के रजवीर्य स्वभाव चेष्टा आदि से ही सन्तान मे
होते हैं ।
योग्य सन्तान
योग्य सन्तान उत्पन्न करने के लिये पति पत्नी दोनो योग्य
और आरोग्य तथा प्रसन्न चित्त, एक दूसरे से हृदय से प्रेम रखने
वाले हो इस प्रकार सभोग होने से सन्तान उत्तम होती है आयुर्वेद
उत्तम सन्तान के लिये अनेकों साधन बतलाता है ।