विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५८ आनन्द मन्दिर
“ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमुपाघ्नत”।
अर्थात् ब्रह्मचर्य के बल से देवता मृत्यु को जीतते थे।
इससे ब्रह्मचर्य का महत्व प्रकट होजाता है। आजकल भी सर्व
साधारण मे देखा जाता है कि जो पुरुष वीर्य का नाश नही
करते उनका स्वास्थ्य बहुत अच्छा रहता है। यदि ऐसे पुरुष
अपने पैतृक असर के कारण दुबले पतले और कमजोर भी
उत्पन्न हो तो भी उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है वे बीमार नही
होते। जितेन्द्रिय ऐसे कितने ही पुरुष देखे गये हैं जिनके वर्षों
सिर तक मे दर्द नही होता है पचास साठ वर्ष की आयु तक वे
देखने मे नौजवान मालूम होते हैं। उनकी आयु लम्बी होती है।
परन्तु जब ऐसा नही होता और कामी पुरुष विषयो मे आंख
मूंद कर अपने को झोक देते हैं तो शरीर के दुश्मन, असमय
में ही शरीर को नाश कर देने वाले कितने ही रोग आघेरते हैं।
थोड़े ही समय में शक्ति का नाश हो जाने से उनकी इन्द्रियां
शिथिल हो जाती हैं। उनका तेज नष्ट हो जाता है और
उनके सारे सुखो पर पानी फिर जाता है। वे किसी काम के नही
रहते हैं। तब तो उनका तमाम समय और धन रोगो के
दूर करने की चिन्ता और रोगो की औषधियों में नष्ट होता है।
इससे सावित होता है कि रोगों की उत्पत्ति का मूल कारण
वीर्यनाश, बहुमैथुन और हस्तक्रिया है।
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