सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 363, कुल 704 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 363

१३२ आनन्द मन्दिर
स्त्री का पीछा नहीं छोड़ते, विषय करते ही जाते हैं। इस प्रकार
बेचारी निरपराध स्त्रिया कुसमय मे ही मूर्ख पतियों की कामाग्नि
की शान्ति में भस्म होजाती हैं अर्थात् जीवन लीला समाप्त
कर जाती हैं।
आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रन्थ चरक सुश्रुत आदिको मे अधिक
मैथुन के विषय मे लिखा है,—
श्रमक्लमोरुदौर्बल्यबल धात्विंद्रियक्षयः ।
अपर्वमरणं च स्यादन्यथा गच्छतः स्त्रियम् ॥
अर्थ यह है कि जो नियम के विरुद्ध अधिक स्त्री प्रसग करते
हैं उन्हे श्रम, क्लान्ति, हृदय की कमजोरी, धातुक्षय, इन्द्रिय क्षय
और अकालमृत्यु आदि रोग उत्पन्न होजाते हैं ।
अधिक वीर्यक्षय से पुरुष को जो जो रोग उत्पन्न होते हैं
उनका पूरा वर्णन इसी पुस्तक मे दूसरी जगह मिलेगा इसलिये
इन सब खराबियो को समझ कर इन बुराइयो से सदैव बचना
चाहिये ।