विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
DevanagariHindipublished704 पृष्ठ
पृष्ठ 353, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 353
२२४ आनन्द मन्दिर
अत्याचार करते हैं वे उलटी समझ वाले हैं और उसका परिणाम
भी उलटा होता है।
मर्दानगी के बदले नामर्दी का सार्टीफिकेट
जो पुरुष अधिक विषय करके अपनी स्त्री से मर्दानगी का सार्टी-
फिकेट लेना चाहते है वे थोडे ही दिनो मे नामर्द हो जाते हैं
और स्त्री उन्हे नामर्द समझने लगती है इस प्रकार उन मर्दानगी
का सार्टीफिकेट चाहने वालो को नामर्दगी का सार्टीफिकेट
मिलजाता है।
मेरे पास इस विषय की अनेको चिट्ठियां प्रति दिन स्त्रियों
की आया करती हैं और जो मेरे पास स्वयं आती हैं वे बेचारी
बडी दुखी होती हैं, पतियों के इन अत्याचारो और मूर्खता
पर रोती हैं।
बहुमैथुन से हानि
बहुमैथुन सब से अधिक हानि कारक है और इस से
खराबिया पैदा होती है पट्ठो की कमजोरी, दृष्टि दुर्बलता, प्रमेह,
स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, पीठ मे दर्द, दिल मे धड़कन, दिमागी कम-
जोरी, दर्द जिगर, सस्त बदहमी, शरीर का दुर्बल होना, दहशत,
सन्तान का न होना या दुर्बल होना, धातुका पानी सदृश पतला
होना, कुरूपता, चेहरे के ऊपर मुर्दापन, नेत्रो मे अशोभा, और
हर एक काम से जी उकताना, किसी से बात करने को जी न