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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २२३
ऐसी औषधियों के बेचने वाले भी खूब प्रशंसा कर औषधियो
का प्रचार करते हैं ऐसी औषधियो के प्रचार से भी स्त्री पुरुषों
की आरोग्यता को बडी भारी हानि पहुंच रही है।
पुरुषों की समझ का उलटा परिणाम
जो नदान्य पुरुष यह समझते हैं कि हमारी स्त्री प्रति दिन
विषय से हम से अत्यन्त प्रसन्न रहेगी और हमे मर्दानगी का
सार्टीफिकेट देगी तथा हमको अधिक चाहेगी वे महामूर्ख हैं
उनकी इस समझ का परिणाम उलटा होता है। यह बात पुरुषो
को ध्यान मे रखना चाहिये कि स्त्री अधिक प्रसग से प्रसन्न नही
होती बल्कि दुखी होती है हालां कि पति के डर से चुप रहती है।
प्रकृति ने स्त्री में कामेच्छा उत्पन्न होना केवल गर्भधारण के समय
तक के लिये बनाया है इसलिये मासिक धर्म होने के बाद
स्नान करने पर अर्थात् ऋतुधर्म से शुद्ध होने पर स्त्री की इच्छा
होती है उस समय रतिक्रिया न हो तो जब तक गर्भधारण का
समय रहता है तब तक ही गर्भवती होने की इच्छा से स्त्री को
पुरुष संग की इच्छा होती है। समय व्यतीत होजाने पर इच्छा
नही रहती ।
जिन स्त्रियों का स्वभाव विषयी पति के अत्याचारो से
विषयी होगया है उनकी बात दूसरी है। स्त्रियां दुष्ट पुरुषों के ही
कारण व्यभिचारिणी होजाती हैं अथवा पूर्व जन्म के पापो के
कारण। वरन स्त्रियो को जैसा समझकर पुरुष अपनी पत्नियो पर