विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६८ आनन्द मन्दिर
है कि इस दशा मे यदि आपके सन्तान होगी तो वह नपुंसक
होगी तब वे कहती है यह वात तो हमारे पति और हमको मालूम
ही नहीं है। सम्भव है यह वात बहुत कम स्त्री पुरुषों को
मालूम हो और जिन्हें मालूम होगी वे अवश्य विचार से रहते होंगे
इस लिये यह वात सब स्त्री पुरुषों को याद रखनी चाहिये कि
जिस स्त्री की योनि मे किसी कारण से दुर्गन्ध आती हो, उन्हे
संभोग नहीं करना चाहिये, इलाज करके गेग को दूर कर लेना
चाहिये। औषधि सेवन तक ब्रह्मचर्य से रहना चाहिये। खराव
दशा में गर्भाधान करके नपुसक पुत्र उत्पन्न करना लज्जा की बात है।
पति दर्शन का महत्व
पूर्वपश्येदृतुस्नाता यादृशंनरमङ्गना ।
तादृशंजनयेत्पुत्रं भर्तारंदर्शयेत्ततः ॥
इसका अर्थ यह है कि ऋतु स्नान करके स्त्री सबसे पहिले
जिस पुरुष को देखेगी वैसी ही सन्तान उत्पन्न होगी इस लिये
सबसे पहिले अपने पति को ही देखे। किसी किसी ऋषि का मत
है कि यदि पति पास मे न हो तो अपने पुत्र को ही देखे, यदि
पुत्र न हो तो पति को देखे। यदि कुछ भी न हो तो उस दिन
एकान्त मे बैठकर पति का हृदय मे चिन्तन करे।
यदि पति घर पर न हो और कहीं निकट ही गया हो तो एकान्त
में बिना किसी दूसरे को देखे हुए पति की प्रतीक्षा करती रहे।
और जब पति आजावे तब शृंगार करके पति का दर्शन करे।