विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८८ आनन्द मन्दिर
पारसल खोलकर औषधि के विधान पत्र मे पथ्यापथ्य और
सेवन करने के समय तक ब्रह्मचर्य से रहना पढ़ते हैं तब वे औष-
धिया वापस कर देते हैं अथवा खिलाते हैं परन्तु ब्रह्मचर्य से
रहना कठिन समझते है। जिस पति की स्त्री की आरोग्यता के
विषय मे यह दशा है उस पति को स्त्री कहां तक अपना प्रेमी
और श्रेष्ठ पति समझ सकती है !
पत्नी पर इस प्रकार के अत्याचार करने वाले पुरुषो की
सख्या कम नही है जब से मैंने आयुर्वेदिक स्त्री औषधालय
खोला है, २५ पचीस वर्षो मे ऐसे पतियो के अत्याचारो से दुःखी
रोग ग्रसित स्त्रियो का इलाज करके उपरोक्त विषय मे करुणा
जनक अनुभव पाया है।
स्त्रियो की सम्भोग इच्छा पति के प्यार से ही पूरी होती है
अधिक विषय से नहीं। जो पुरुष अनेक बार विपरीत सम्भोग
कर पत्नी की तृप्ति करना चाहता है वह महा मूर्ख है और जो
एक ही बार नियम पूर्वक पत्नी को प्यार और प्रेम से सन्तुष्ट
और प्रसन्न कर सम्भोग करता है वही अपनी पत्नी को तृप्त
कर सकता है। प्रतिदिन सम्भाग करने वाले की अपेक्षा ऋतुस्नाता
पत्नी से महीने मे एक बार सम्भोग करने वाला कहीं अच्छा है।
उससे स्त्री की इच्छा भी पूरी होती है। पति भी सामर्थवान
सावित होता है और ऐसा पुरुष शास्त्र के अनुसार ब्रह्मचारी ही
कहलाता है, विषयी या कामी नहीं। साथ ही उसका शारीरिक
नाश भी नही होता है।