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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १८७
स्त्रियों की संभोग इच्छा
स्त्रियो की संभोग इच्छा मासिकधर्म्म से शुद्ध होने के बाद
प्रवल होती है उस समय नियम पूर्वक गर्भाधान क्रिया करके
अपनी पत्नी को संभोग से तृप्त करने वाले पति को ही पत्नी
बलवान और योग्य पुरुष समझती है तथा सन्तुष्ट रहती है,
इसके विरुद्ध जो प्रतिदिन संभोग करके अधिक विषय से ही
स्त्री तृप्ति करना बुद्धिमानी समझते हैं उनकी स्त्रियां पति से सन्तुष्ट
नहीं रहतीं और प्रेम भी जैसा चाहिये वैसा नहीं रहता क्योंकि
विषयी पुरुष केवल विषयावासना की तृप्ति से काम रखते हैं वे
उसी समय पत्नी को पत्नी समझते हैं उसके रोगी होने पर रोगो
की कुछ परवाह नहीं करते, देखने में आता है कि हजारो स्त्रियां
वर्षों से रोग की परीक्षा के लिये आने को लिखती हैं जब स्त्री
के पत्र का उत्तर मैं देती हू और वह पति को मिलता है तो
वह उत्तर देता है कि स्त्री का इलाज कराने के लिये भेजने
से मुझे अनेक प्रकार का कष्ट हो जावेगा इसलिये अभी नहीं
आ सकती, स्त्री तो रोगो के दुःख के कारण मर रही है और
इलाज कराना चाहती है पर पति जी को अपने ऐश आराम से
काम है। लाचार हो स्त्री इलाज कराने से बाज आती है।
जो रोगी स्त्री के लिये पार्सल से औषधियां मंगाते हैं उनमें
भी अनेक पुरुष ऐसे होते हैं जो ब्रह्मचर्य से रहकर स्त्री का
इलाज कराना ही नहीं चाहते। औषधियां तो मंगालेते हैं पर जब