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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 299

१८० आनन्द मन्दिर
पहुँचने लगती हैं तब इलाज कराने की सूझती है। इलाज कराने
से जहां कुछ आराम हुआ कि पति जी ने कृपा करनी शुरू करदी
फिर प्रेम उत्पन्न हुआ कुछ दिनो बाद स्त्री फिर रोगी होगई। स्त्री
ही नही, रोगी स्त्री से प्रसग करने से पति भी रोगी होजाते हैं
अतएव पुरुषो की भी रोगी सख्या स्त्रियो से कुछ कम नहीं है
क्योकि पच्चीस वर्षो में लाखो स्त्रियो का तथा स्त्रियो द्वारा उनके
पतियो का भी इलाज करने से इस बात का अनुभव हुआ है कि
रोगी स्त्री से सहवास करने से पुरुष और रोगी पुरुष के सहवास
से स्त्रियां रोगी पाई जाती हैं। स्त्रियो के बहुत से रोग तो ऐसे हैं
जो उनके व्यभिचारी पति से मिलते हैं। जैसे गर्मी सुजाक। जिनके
पुरुष व्यभिचारी नहीं हैं परन्तु अधिक विषयी हैं और वे विषय
की अधिकता से सुस्ती शीघ्रपात और नपुंसकता के कारण
अपनी स्त्री की इच्छा पूरी नही कर सकते इस लिये इच्छा पूरी
न होने से स्त्रियो के अनेक रोग उत्पन्न होजाते हैं।
अनेक रोग स्त्री पुरुषों का ठीक जोडा न मिलने से स्त्रियो
मे उत्पन्न होजाते हैं।
जोडा न मिलने से प्रकृति नहीं मिलती इस कारण पति
पत्नी मे कलह रहती है इस कारण स्त्रियो के हर समय पति के
बर्ताव से कुढ़ते रहने से भी रोग उत्पन्न होजाते हैं। वे रोग
औषधियो से अच्छे नही होते क्योकि कारण तो बने ही रहते
है तब औषधि अपना प्रभाव कैसे डाले। चिकित्सा वास्तविक
रोग की करनी चाहिये।