विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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पुरुष से संयोग करने योग्य होती है इस प्रकार ऋतुधर्म से शुद्ध
हुई स्त्री चौथे दिन स्नान करके धुले हुए सफेद कपड़ो को पहिन
कर रोरी हल्दी केशर सिंदूर आदि श्रृंगार कर सर्व आभूषणों को
पहन सुगन्धित फूलो की माला आदि से सुसज्जित हो गीतादि
मंगल कार्यों से प्रसन्न हो जिसने स्वस्ति वचन कराया हो ऐसे
पति का सब से प्रथम दर्शन करे तात्पर्य यह है कि ऋतु धर्म्म
से स्नान करके स्त्री पहिले पति का ही दर्शन करे ।
सहवास और गर्भाधान
विवाह होजाने पर पति पत्नी दोनो की इच्छा विषय वासना
की ओर प्रबल होती है संसार मे विलासिता और विषय लोलुपता
दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है जो विषय शक्ति केवल सन्तान
उत्पत्ति के लिये ही उचित समझी जाती थी वही अब प्रतिदिन
आनन्द वृद्धि के लिये काम मे लाई जाती है ।
पुरुषो ने स्त्रियो को केवल विषय वासना का तृप्ति कारक
यन्त्र समझ रक्खा है। पति पत्नी से केवल इसी लिये प्रेम करते
सुने जाते हैं, यह झूठा प्रेम है। मेरे पास पचीस वर्षों मे अब तक
लाखो ही स्त्रियां अपना इलाज कराने आई उनकी जबानी पति
के इस झूठी प्रेम की कहानियां मालूम होती हैं। पति केवल विषय
के लिये ही पत्नी से प्रेम करते हैं जब पत्नी बीमार होजाती है
इच्छा पूरी नही कर सकती तब उतना प्रेम नही रहता और जब
रोगो के अधिक बढ़ जाने के कारण शक्ति हीन हो मृत्यु के निकट