विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 295, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ें१७८ आनन्द मन्दिर
क्रीड़ा कौतुक ( हंसी खेल ) न करे, विवाहादि उत्सव और
सभा दर्शन न करे, हसे नही और पराये घर भी न जावे ।
शास्त्रकारो ने इसी कारण स्त्रियो के लिये ऐसी आज्ञा दी
है जिसका पति न हो अथवा विदेश गया हो तो ऊपर लिखे
अनुसार रहना चाहिये जिससे चित्त मे किसी प्रकार का विकार
उत्पन्न न हो । जिनके पति न हो उन्हे तो सदैव ही बहुत सादगी
से रहना बतलाया है जिससे किसी प्रकार का दोष न उत्पन्न हो।
गर्भाधान क्रिया
ततः शुद्धस्नातां धौतवास समलंकृतां ।
कृत मङ्गल स्वस्तिवाचनं भर्तारं दर्शयेत् ॥
ऋतुधर्म्म से तीन दिन व्यतीत होने के बाद शुद्ध आर्तव
इकट्ठा हुआ अर्थात् पुराना एक मास से इकट्ठा हुआ आर्त्तव
निकल कर शुद्ध हुए नवीन आर्त्तव को प्राप्त हुई स्त्री शुद्ध कही
जाती है जैसे कहा है:—
नवेऋतौच संजाते विगते जीर्ण शोणिते ।
नारी भवतिसंशुद्धा पुमां संसृज्यते तदा ॥
अर्थात्—नवीन आर्त्तव प्राप्त होने से और इकट्ठा हुआ पुराना
आर्त्तव का रक्त निकल जाने से स्त्री शुद्ध होती है। उस समय