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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १७७

श्रमीलितनयनानां यः,
सुरतरसोऽनुसंविदं कुरुते ।
मिथुनैर्मिथोवधारितमत्रितथ,
मिदमेव कामनिर्वहणम् ॥
अर्थात्—आलस्य भरी नेत्रों वाली स्त्रियों को सम्भोग से
तृप्ति करना यही स्त्री पुरुष दोनों का परस्पर काम पूजन है। जो
पति स्त्री से विरक्त रहता है ऋतु के बाद संभोग नहीं करता तो
इस प्रकार पत्नी के हृदय से पति की ओर से विरक्तता और
उदासीनता उत्पन्न होती है और स्त्री का हृदय दुखित रहता है।
जिस स्त्री का पति विदेश गया हो अथवा रोगी हो अथवा
न हो तो स्त्री को पति का चिन्तन करना चाहिये। उस स्त्री के
लिये शास्त्रकार आज्ञा देता है —
विवर्णा दीनवदना देह संस्कारादिवर्जिता ।
पतिव्रता निराहारा शोचते प्रोषिते पतौ ॥
स्वामी के विदेश जाने पर पतिव्रता स्त्री देहसस्काराद
(शृङ्गार) त्याग कर दीनभाव से रहे किसी प्रकार का शृंगार न
करे। पति की भक्ति और उसकी चिन्ता करती रहे।
क्रीडां शरीरसंस्कारं समाजोत्सवदर्शनम् ।
हास्यं परगृहे यानं त्यजेत्प्रोषित भर्तृका ॥
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