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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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१७६ आनन्द मन्दिर
का आर्तव पतला होकर पुरुष के वीर्य से मिलजाता है और यही
गर्भ होने का कारण होता है।
इस लिये स्त्रियों को स्खलित करने के लिये इससे बढ़कर
दूसरा कोई उपाय नही है कि पति स्त्री का सच्चे हृदय से प्यार
कर आलिंगन चुम्बन कर प्रसन्न करके संभोग करे, नोच खसोट
कर नही।
गर्भाधारणा का समय
क्षामप्रसन्नवदनां स्फुरच्छ्रोणिपयोधराम् ।
स्रस्ताक्षिकुक्षिं पुंस्कामा विद्यादृतुमती स्त्रियम् ॥
अर्थात् — चेहरे पर दुर्बलता और प्रसन्नता, कमर के पीछे
के हिस्से में और स्तनों मे फडकन, आखों में और कोख मे
शिथिलता हो और पुरुष के साथ रमण करने की इच्छा ये सब
बाते जिस स्त्री मे होती हैं उसे ऋतुमती समझना चाहिये यही
सम्भोग करने और गर्भाधान का समय है।
इसी समय स्त्रियो को सम्भोग की इच्छा गर्भाधान के लिये
होती है जो पुरुष इस समय सम्भोग नहीं करते उन्हे एक प्रकार
का गर्भाधान न करने का दोष लगता है।
पति का धर्म है कि ऋतु से शुद्ध हुई पत्नी से सम्भोग अवश्य
करे यह धर्मशास्त्र कहता है और कामशास्त्र के अनुसार ऋतु
के पश्चात स्त्रियो को सम्भोग से तृप्त करना पति का धर्म है इसी
लिये शास्त्रकारो ने कहा है।