विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७४ आनन्द मन्दिर
भी ऋतु स्नान के बाद ही गर्भाधान के लिये सम्भोग की इच्छा
करती हैं।
ऐसी स्त्रियाँ भी मेरे पास अनेक आईं कि जिनके पति ऋतु-
मती होने पर ही महीने मे एक दो बार सम्भोग करते हैं उनकी
सन्तान भी हृष्ट पुष्ट देखी गई । पुत्र ही पुत्र होने के कारण वे
कन्या होने की इच्छा से मेरे पास उपाय व इलाज पूछने आई ।
किसी के कन्याए ही कन्याए है वे पुत्र की इच्छा से उपाय पूछने
आईं। अनेक स्त्रिया ऐसी भी आई जिनके पति वर्ष भर मे एक
ही बार सम्भोग करते हैं। उनके एक ही दो सन्तान होकर बन्द
होगई, परन्तु ऐसी पुरुषो की संख्या बहुत कम है। कई स्त्रियां
भी आई जिनके पति ने केवल सन्तान न होने तक ही सम्भोग
किया। एक पुत्र होजाने पर सम्भोग बन्द कर दिया। उनकी स्त्रियां
भी दूसरे बालक के लिये उपाय पूछने आई । ससार मे सभी
प्रकार के स्त्री पुरुष मौजूद है परन्तु अधिकता किसी काम की
अच्छी नहीं होती सब काम सीमा मे ही अच्छे लगते हैं।
अति सर्वत्र वर्जयेत्
अति सब कामो की हानि कारक है इसलिये मनुष्य को
नियम पूर्वक सब काम करने चाहिये ।
स्त्री प्रसग अर्थात् सम्भोग करते समय ऐसा उपाय करना
चाहिये जिससे पति पत्नी दोनो को सम अर्थात् बराबर आनन्द
प्राप्त हो ।