विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र १६६
स्मशान यात्रा की तैयारी करनी पड़ती है इसलिए मैं प्रार्थना
करती हूँ कि बहुत मिर्च, खटाई, बहुत नमक, अधिक उष्ण
वस्तुओं का सेवन करते रहने से भी धातुक्षीणता रोग आदि हो
जाते हैं इस कारण इन्हें अधिक न खाना चाहिये ।
मानसिक—घृणा, भय, शोक आदि से चित्त की रुचि
प्रतिकूल होकर बल और पुष्टी होने पर भी दुर्बलता मालूम होती
है इसका इलाज औषधियों से नहीं होता है इस के अतिरिक्त
इन्द्रियों में अनेक प्रकार के दोष, सुजाक, वादी फरंग इत्यादि
भी धातु की दुर्बलता के कारण हो जाते हैं ।
शुद्ध वीर्य की पहिचान
वीर्य क्षीणता से स्मरणशक्ति घट जाती है, नपुसकता
आजाती है सर्व प्रकार के धर्म्म कार्य करने से वह व्यक्ति पराङ्-
मुख रहता है उसकी सन्तानोत्पादक शक्ति का नाश हो जाता है।
तात्पर्य यह है कि वह मनुष्य निकम्मा हो जाता है ।
सुश्रुत शरीर स्थान अध्याय २ में लिखता है:—
स्फटिकाभंद्रवं स्निग्धं मधुरं मधुगन्धिच ।
शुक्रमिच्छन्ति केचित्तु तैलं क्षौद्रनिभं तथा ॥
अर्थात्— शुद्ध शुक्र स्वच्छ स्फटिक (विलौर कांच) के
समान द्रव (पिघला) चिकना, शहद के समान गन्धवाला
होता है। कोई कोई आचार्य तैल और शहद के सदृश रंग वाले