विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६४ आनन्द मन्दिर
वैद्यकशास्त्र बतलाता है कि स्त्रियां अधिक प्रसंग की इच्छुक
नहीं होतीं। नियम पूर्वक संभोग से गर्भवती होने की इच्छुक
होती हैं और जो पति अपनी स्त्रियों को अधिक प्रसंग से तृप्त
करना चाहते हैं उनकी स्त्रियां अधिक प्रसंग से दुःखी होकर रोगी
तो हो ही जाती हैं किन्तु पति से विरक्त भी होजाती हैं और
सभोग से डरती रहती हैं। वे नियम पूर्वक संभोग की इच्छुक
रहती हैं। विषयी पति से तंग आकर उदासीन रहती हैं, अधिक
प्रसंग के कारण सन्तान हीन होजाती हैं उनके कभी गर्भ नहीं
रहता, यदि रहा भी तो गर्भस्राव व गर्भपात हो जाता है। नियम
पूर्वक सम्भोग करने वाला पति सम्भोग से पत्नी की तृप्ति कर
सकता है और अधिक प्रसंग करने वाला पति अपनी स्त्री के
प्रति कलंकित होने का कारण बनता है।
स्त्रियों का कामोद्दीपन
स्त्रियों को कामोद्दीपन ऋतुस्नान के दिन से ही होता है यदि
उस समय पति का संयोग न हो अर्थात् पति पास हो और
सम्भोग न करे तो स्त्री उसे शक्तिहीन (नपुंसक) समझने लगती
है और निराश होजाती है तथा रोगी होजाती है। क्योंकि वक्त
पर पति उसे सन्तुष्ट नहीं कर पाता है।
स्त्रियों में कामोद्दीपन (सभोग की इच्छा) ऋतुस्नान
के बाद ही गर्भधारण के लिये होता है इसके विषय में
आयुर्वेद बतलाता है।