विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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होता है कि उनकी इच्छा समय पर नहीं होती इसलिये वे ऋतु-
स्नान के बाद स्त्री की इच्छा होने पर सभोग नहीं कर सकते ।
कुसमय उनकी इच्छा होती है, वह झूठी इच्छा है इसलिये
स्त्री का स्पर्श करते ही स्खलित होजाते हैं ।
पुरुषों के इस रोग का भी कारण अधिक संभोग ही है
उनके रोगी फार्म देखने से मालूम होता है कि उन्होंने विवाह
होने ही कुछ दिनो तक प्रति दिन अनेक प्रकार से विपरीत रति-
क्रिया करके अपने शरीर का सत्यानाश मार लिया अब यह
दशा होगई कि स्त्री की इच्छा होने पर महीने मे एक बार भी
गर्भाधान क्रिया नहीं कर सकते ।
इसके विषय में पीछे लिखा जा चुका है आयुर्वेद
बतलाता है कि संभोग के समय पति पत्नी दोनों एक साथ
स्खलित हो तो नपुंसक सन्तान उत्पन्न होती है अतएव आयुर्वेद
का कथन मानने योग्य है और मनगढत कामशास्त्र सम्बन्धी
पुस्तको का मत मानने के योग्य नहीं क्योंकि इससे अनेक प्रकार
की हानि होती है ।
स्त्रियां अधिक संभोग की इच्छुक नहीं
सन्तान की इच्छुक होती हैं
जो मूर्ख पति अपनी स्त्रियो के स्वभाव को विषयी बतादेते
हैं अथवा जो स्त्रिया दुष्ट पुरुषो अथवा दुष्ट स्त्रियो की कुत्संगति
से दुष्ट स्वभाव की होजाती हैं उनकी बात ही और है । वर्ना