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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १६१
के कारण रोगी होजाती हैं उन स्त्रियों का मासिक धर्म समय के
पहिले ही बन्द होजाता है और रोग के कारण अधिक तथा कम
भी होजाता है और अधिक दिनों तक जारी रहता है तथा जवानी
में ही बिलकुल बन्द होजाता है। इसी प्रकार जो लड़कियां कुसङ्गति
में पड़ जाती हैं ओर कामोद्दीपन करने वाले गन्दे किस्सा कहानी
उपन्यास पढ़ा तथा सुना करती हैं वे बारह वर्ष की अवस्था के
पहिले ही ऋतुमती होने लगती हैं और उनकी इच्छा रतिक्रिया
की ओर दौड़ती है। उनको कामोत्तेजन होने का कोई नियम
नहीं है जो स्त्रियां इस प्रकार कुसङ्गति में पड़ जाती हैं वे
अनियम ऋतुधर्म से होने लगती हैं और उनके ऋतुधर्म बन्द
होने का भी कोई नियम नहीं है। यदि विवाह होने पर उन्हें
योग्य पति मिल जाये और वे उन्हें योग्य बना कर अच्छे अच्छे
धार्मिक ग्रन्थों की शिक्षा देकर नियम पूर्वक रतिक्रिया करे तो वे
सुधर सकती हैं और सन्तान भी अच्छी हो सकती है। क्योंकि
कामोद्दीपन में मानसिक वृत्तियों का जबर्दस्त असर पड़ता है।
स्त्रियों को योग्य अथवा अयोग्य बनाने वाले पुरुष ही हैं,
बाल्यावस्था में माता पिता को इस बात का ध्यान रखना चाहिये
कि लड़कियां गन्दी पुस्तकें न पढ़ने पावे। तथा दुष्ट लड़कों
लड़कियों के साथ न रहने पावे। आज कल तो लड़कियां
लड़कों के साथ ही पढ़ा करती हैं और स्वतन्त्र होती जाती हैं इन्ही
कारणों से ऋतुधर्म्म का भी कुछ नियम नहीं रहा। जल्दी आरम्भ
होता है ओर जल्दी बन्द होता है तथा ऋतुधर्म्म में अनेक प्रकार
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