विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४६ आनन्द मन्दिर
प्रसन्न करे और सन्तान कैसे हो । यदि गर्भ रहा तो गर्भस्त्राव व
गर्भपात की शिकायत होगई । सभोग शक्ति ठीक न रहने से स्त्री
भी रोगी होगई ।
कोई कोई कालेज में पढ़ भी रहे हैं और विवाह होजाने पर
इधर भी पूरी शक्ति लगाकर अधिक विषय में लिप्त हो वीर्य का
सत्यानाश मारने लगे और थोड़े ही दिनों में शक्ति हीन होगये
इत्यादि कारणों से दाम्पत्य प्रेम का आनन्द नहीं मिलता । जो स्त्रियां
मेरे पास इलाज के लिये आती हैं, प्राय. सभी की जबानी यह
सब हाल मालूम होता है । जो स्त्रिया सकोच वश अपने पति
का हाल ठीक ठीक नहीं बतलाती उनके पति की चिकित्सा
करने से पूरा हाल मालूम होजाता है। इस प्रकार से बेमेल
बाल्यावस्था के विवाह से भी दाम्पत्य सुख का आनन्द जैसा
चाहिये नही मिलता । दाम्पत्य प्रेम के लिये आरोग्यता मुख्य
है और आरोग्यता वीर्य रक्षा से ही मिलती है । यदि बाल्या-
वस्था में वीर्य रक्षा पूर्ण रूप से नहीं की जाती तो जीवन भर
दाम्पत्य प्रेम का आनन्द मिलना कठिन होजाता है ।
वीर्य शरीर का राजा है जो पुरुष उसकी कदर नहीं करता
वह आयु पर्यन्त भाँति भाँति के रोगो में फसा रहता है, उसे कभी
दाम्पत्य सुख जैसा चाहिये नहीं मिलता, इसलिये मनुष्य मात्र
को वीर्य रक्षा करनी चाहिये । इस विषय में आगे आरोग्य शास्त्र
प्रकरण मे विस्तार पूर्वक लिखा गया है ।