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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 235

१४२ आनन्द मन्दिर
यदि शंखिनी जाति की स्त्री मृग जाति के पुरुष की पत्नी हो
और सन्तान उत्पन्न करे तो उसकी सन्तति गुणवान रूपवान
अच्छे आचरण वाली और सुन्दर कुटुम्ब की उन्नति करने वाली
होती है।
चित्रणी जाति की स्त्री को यदि अश्व जाति का पति मिलता
है तो सन्तान अल्पायु और दोषोवाली होती है। पुत्र तो जीते
ही नहीं कन्या यदि जीवित रही तो कुष्ट रोगी, नेत्र हीन होती है।
पति पत्नी सन्तान से सदैव दुखी रहते हैं।
पद्मिनी स्त्री यदि शशक जाति के पुरुष की पत्नी हो तो उसकी
सन्तान अनेक गुणवाली, धर्मात्मा, सुन्दर स्वभाव वाली, अच्छे
आचरण वाली होगी। पुत्र कन्या जो हो सभी सन्तान गुणवान
और सुशील धर्माचरण वाली होगी।
पद्मिनी स्त्री का विवाह यदि मृग जाति के पुरुष से हो जावे
तो अनेक गुणदोष वाली सन्तान होती है। माता पिता दोनो के
गुण दोष सन्तान मे आते हैं। सुख दुःख तो इनकी सन्तान
भोगती ही है परन्तु अल्पायु भी होती है।
चित्रणी जाति की स्त्री का पति यदि वृषभ जाति का
हो तो उसकी सन्तान बाल्यावस्था मे ही मर जाती है इसलिये
इन पति पत्नी को सन्तान का दुःख जीवन पर्यन्त रहता है।
शंखिनी जाति की स्त्री यदि वृष पुरुष से विवाही जावे तो
पुत्र अनेक गुणवाला और कन्या व्यभिचारिणी दुष्ट स्वभाव
वाली शौकिन और मूर्खा होती है।