विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १४१
उसकी सन्तान रोगी और अनेक दोषोंवाली होगी जैसे पुत्र
हो तो अन्धा वहिरा रोगी निर्बल और दुर्बल होगा। कन्या होगी
तो उसमे भी इसी प्रकार के दोष होंगे और व्यभिचारिनी होगी।
हस्तिनी जाति की स्त्री का पति वृषभ जाति का पुरुष हो
तो उससे सन्तान अनेक गुण दोष युक्त होती है। पुत्र हो तो परा-
क्रमी, बलवान और दुष्ट स्वभाव का होगा और कन्या होगी तो
महा व्यभिचारिणी होगी जिसमे उसके पति को महान कष्ट होगा,
प्राणनाशक होगी ।
चित्रणी जाति की स्त्री का विवाह यदि शशक जाति के
पुरुष से हो तो इससे सन्तान अनेकों गुण दोष युक्त होती है।
पुत्र हो तो रोगी निर्बल और कम आयुवाला परन्तु अच्छे
स्वभाव वाला होगा कन्या रूपवती उत्तम स्वभाव वाली परन्तु
सदैव कष्ट और दुःख मे जीवन व्यतीत करने वाली होगी
क्योकि वह बूढ़े पति की स्त्री होती है ।
पद्मिनी जाति की स्त्री यदि अश्व जाति के पुरुष की पत्नी
हो तो उससे अनेक दोषो वाला नपुंसक पुत्र होता है और रोगी
रहता है। यदि कन्या हो तो माता की समान गुणवाली होती
है क्योंकि पुत्र मे पिता के गुणदोष और कन्या मे माता के गुण
दोष होते है।
चित्रणी स्त्री यदि मृग जाति के पुरुष की पत्नी हो तो उसकी
सन्तान अनेक गुणोवाली होती है पुत्र कन्या दोनो रूपवान
गुणवान और धर्म्मात्मा होते हैं।