विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४० आनन्द मन्दिर
केशो वाली, पतिव्रता, धर्म्म परायणा, नम्र स्वभाव वाली और
वढ़ो की सेवा करने वाली होती है ।
इसी प्रकार जन्म पत्र से कन्या और वर के कुल लक्षण व
प्रकृति विवाह के पहिले मिलाने की प्रथा भारत वर्ष में बहुत
दिनों से चली आती है यह तो उदाहरण के लिये कुछ थोडा
विषय नाम मात्र को यहां लिखा गया है। यह वड़ा भारी विषय है
पाठक पाठिकाएं इसी से समझ ले कि हमारे देश मे ऋषियों ने
कितने विचार कर विवाह की प्रथा योग्य जोड़ा मिलाने के
उद्देश्य से रखी है ।
कामशास्त्र आदि ग्रन्थों का मत
मृग जाति के पुरुष से यदि हस्तिनी स्त्री का सम्बन्ध हो तो
उससे जो सन्तान होगी वह दुष्ट स्वभाव वाली होगी। पुत्र
होगा तो वह पशुओं के समान मूर्ख दुराचारी होगा और
यदि कन्या उत्पन्न होगी तो व्यभिचारिनी और पति की प्राण
घातक होगी ।
हस्तिनी स्त्री का सम्बन्ध यदि अश्व जाति के पुरुष से हो
तो उसका पुत्र वलवान पराक्रमी और वीर पुरुष होगा। निर्भय
किसी से न डरने वाला होगा। यदि कन्या होगी तो वह
व्यभिचारिणी विषय भोग की अत्यन्त इच्छा रखने वाली और
पर पुरुष गामिनी होगी ।
शंखिनी स्त्री का पति यदि अश्वजाति का पुरुष हो तो