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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 228

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १३७

बृहस्पति के त्रिंशांशक से सुन्दर स्वभाव वाली और शनिश्चर
के त्रिंशांशक से दासी कर्म करनेवाली होती है। बुध राशि
में लग्न अथवा चन्द्रमा के होने मे तात्कालिक भौमका त्रिंशांश
हो तो वह स्त्री कपटी होती है।
बृहस्पति के त्रिंशांशक से सत्यधर्म वाली और शनिश्चर के
त्रिंशांश से हीजडी होती है अर्थात् उनके गर्भाशय नहीं होता।
इसी प्रकार से शुक्र के त्रिंशांश में बिखरे (फैले) मुख वाली
और और बुध के त्रिंशांश से गुणवती होती है।
जीव सम्बन्धी त्रिंशांश हो तो गुणवाली होती है और
शनिश्चर के त्रिंशांश से पुर्नभूः अर्थात् एक बार जिस वर से
विवाह सम्बन्ध नियत होगया हो परन्तु किसी कारण से उसके
साथ विवाह न होकर दूसरे वर से विवाह हो, ऐसी होती है।
यदि लग्न अथवा चन्द्रमा कर्कराशि का हो और उसमें
तात्कालिक मंगल का त्रिंशांशक हो तो वह स्त्री दूसरे का कहना
नहीं मानने वाली केवल अपनी ही हठ पर दृढ़ रहने वाली होती
है। यदि शुक्र का त्रिंशांश हो तो स्त्री कुल को पवित्र करने
वाली और यशवती होती है।
बुध के त्रिंशांश में चित्रकारी जानने वाली और बृहस्पति
के त्रिंशांश में बहुत से गुणों वाली होती है। सूर्य के त्रिंशांश
में पति की मारनेवाली होती है। सिंह राशि की लग्न अथवा
चन्द्रमा में तात्कालिक भौम त्रिंशांश होने से आचार भ्रष्ट और
शुक्र के त्रिंशांश से पतिव्रता सती होती है।