विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३६ आनन्द मन्दिर
कन्या का जन्म पत्र
कन्या के जन्म पत्र में अष्टम स्थान मे विधवा योग्य तथा
सौभाग्यवती रहने का पता चलता है। लग्न से स्त्री का शील
स्वभाव और शरीर के गुण अर्थात् प्रकृति मालूम होती है और
स्वरूप अथवा कुरूप का पता चलता है। सप्तमस्थान से पति की
प्रकृति का तथा पति से स्त्री को सुख अथवा त्याग का पता चलता
है और पंचम स्थान से सन्तान का पता चलता है कि कितने पुत्र
कितनी कन्याएं होगी, पहिले क्या सन्तान होगी।
जो लग्न और चन्द्रमा इन दोनो की समराशि हो तो
स्त्री स्वभाव से ही शीलवती और रूपवती होती है। जो लग्न
चन्द्रमा इन दोनो को शुभ ग्रह देखते हो तो स्त्री गुणवती
होती है।
विषम राशि मे जिस कन्या का जन्म हो वह स्त्री पुरुष के
स्वरूप से शील वाली और खोटे स्वभाव वाली दुखिया होती
है। जो क्रूर ग्रहो करके विषमराशि दृष्ट या युक्त हो तो स्त्री
पापिनी शुभगुणो से हीन होती है।
लग्न वा चन्द्रमा जो भौमक्षेत्री हो और तात्कालिक भौम
त्रिंशांशक भी हो तो वह स्त्री कन्यावस्था से ही दुष्टा होती है
इसी प्रकार भौमक्षेत्री लग्न वा चन्द्रमा होने मे शुक्र का त्रिंशांश
हो तो वह स्त्री खोटे आचरणवाली होती है। यदि बुध का
त्रिंशांश हो तो वह स्त्री मायायुक्त होती है।