विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२८ आनन्द मन्दिर
लहसुन, हींग, मट्ठा, वैंगन, खिचड़ी, दही, कढ़ी, सरसों का
तैल, सौंफ, खट्टा, चरपरा, कडुवा, गरम, धूप में फिरना, कसरत
करना, गुड़ का सेवन, दिन में सोना, अनियम संभोग करना,
उरद के पदार्थ, रात्रि में जागना, क्रोध और चिन्ता करना ये
शरद में सेवन करने से अनेक रोगों को उत्पन्न करते हैं इसलिये
आरोग्य रहने की इच्छा रखने वालो को ये पदार्थ शरद् में अवश्य
छोड़ देने चाहिये।
आवश्यक सूचना
हेमन्त, शिशिर, वर्षा
इन तीनों ऋतुओ मे मीठा, खट्टा और नमकीन इन तीनों
प्रकार के रसो का प्रति दिन भोजन के साथ कुछ आहार अवश्य
होना चाहिये।
वसन्त ऋतु
वसन्त ऋतु में चरपरे कडुए और कसैले रसों के पदार्थ
प्रति दिन के भोजनों में अवश्य होने चाहिये।
ग्रीष्म ऋतु
ग्रीष्म मे मीठे और पतले पदार्थों का सेवन प्रति दिन के
भोजनो में अवश्य होना चाहिये। इन ऋतुओं मे ये पदार्थ
जठराग्नि को ठीक रखते हैं।