विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११४ आनन्द मन्दिर
धानों का लावा, सेंधा नमक पड़ा हुआ गाय का मट्ठा, कढ़ी
आदि खाना हितकारी है।
वसन्त ऋतु में हानिकारक पदार्थ
उड़द, दही, आलू, गत्रा, सिंघाडे, बड़ी, मुगौड़ी, पोई का
शाक, खिचडी, तिल, चिउरा, भैंस का दूध, दिन में सोना, खट्टे
पदार्थों का सेवन करना, चिकने गरिष्ठ और घी में पकाए हुए
देरी में पचनेवाले पदार्थों का सेवन करना बसन्त में हानि-
कारक हैं इनका सेवन न करे।
रूक्षं कषायं कटुकं च तिक्तं,
ताम्बूलकर्पूर मनोज्ञवेषम् ।
क्षौद्रेण पथ्या सह सेवनीया,
स्नेहेन तिष्ठेद्दयितासहायः ॥
रूखे, कपैले और कडुए रस और पान कपूर तथा शहद
मिला हर्ड का चूर्ण सेवन करना अत्यन्त हितकारी है। उज्ज्वल
वेष रखना और प्रेम सहित अपनी प्रिय पत्नी के साथ रहना
ये वसन्त में आरोग्यता को देने वाले हैं।
अच्छाच्छचन्दनरसार्द्रकरा मृगाक्ष्यो-
धारागृहाणि कुसुमानि च कौमुदी च ।