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सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 189

११२ आनन्द मन्दिर
जो मूर्ख कहते हैं कि—
अभी तो चैन से गुजरती है, आकबत की खुदा जाने।
उन अज्ञानियो को न इस जन्म का ही आनन्द मिलता हैं
न अगले जन्म का। क्योकि इस जन्म से व्यभिचार आदि से
उनके शरीर को आगे चल कर वडा कष्ट मिलता है। बड़े बड़े
राजा महाराजाओ तक को देखा गया है कि व्यभिचार के कारण
तबाह हो गये। सर्वस्व खो बैठे, मान मर्यादा धन सम्पत्ति सब नष्ट
होगई। शरीर का सत्यानाश हो गया। तात्पर्य यह् कि सब प्रकार
से यह् अमूल्य मनुष्य जीवन नष्ट हुआ। इसीप्रकार अगले जन्म
मे भी उन्हे कष्ट भोगना पड़ता है।
वसन्तऋतु का आहार विहार
(चैत और वैशाख वसन्त ऋतु)
कफश्चितोहि शिशिरे वसन्तेऽर्कांशुतापित ।
हत्वाग्निं कुरुते रोगानतस्तं त्वरया जयेत् ॥
अर्थात् शिशिर ऋतु मे संचित हुआ कफ वसन्त ऋतु मे
सूर्य की किरणो से तापित हो पानी के समान पतला होकर जठ-